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भोपाल में दिलकश और भदभदा मस्जिद पर कार्रवाई टली

 

भोपाल/भोपाल में दिलकश और भदभदा मस्जिद पर कार्रवाई टली: आपत्ति के पश्चात भदभदा मस्जिदों को हटाने का निर्णय टला आपत्ति पर प्रशासन पहले सुनवाई करेगा; 4 जुलाई को जारी हुआ था नोटिस वक़्फ़ बोर्ड ने किया मामले में मांग के पश्चात हस्तक्षेप

जमीअत उलमा मध्यप्रदेश मीडिया प्रभारी हाजी मोहम्मद इमरान जमीअत की टीम ने की थी मांग धर्म स्थलों मस्जिदों मंदिरों के मामले में निष्पक्ष व्यापक और न्याय पूण दृष्टिकोण अपनाए मध्यप्रदेश सरकार भोपाल के भदभदा इलाके के पास स्थित मस्जिद दिलकश भदभदा चौराहा और मस्जिद मोहम्मदी भदभदा भोपाल को राजधानी परियोजना भोपाल के अधिकारियों द्वारा ग्रीन बेल्ट में और अवैध कब्जा बताकर नोटिस जारी किया था

 

जमीअत उलमा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने इस पूरे मामले की कड़ी निंदा करते हुए मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड से हस्तक्षेप की मांग की थी दोनों मस्जिदें दशकों पुरानी और रियासती दौर की ऐतिहासिक मस्जिदें हैं , जिनके दस्तावेज भी मौजूद हैं । ये मस्जिदें मध्यप्रदेश के गजट और वक्फ रिकॉर्ड में भी दर्ज हैं। इसके बावजूद इन्हें अवैध कब्जा बताकर तोड़े जाने का नोटिस देना पूरी तरह अन्यायपूर्ण कदम था

 

जमीअत उलमा ने सवाल किया कि इस तरह किसी भी पुरानी आबाद मस्जिद को अवैध कब्जा बताकर तोड़े जाने का नोटिस कैसे दिया जा सकता है उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास रहा है कि प्राचीन बस्तियां नदी , तालाब अथवा पानी के किनारे ही बसती थीं क्योंकि पहले के समय में नल, ट्यूबवेल जैसे सुविधाएं नहीं थीं। लोग नदियों, तालाबों, झीलों के किनारे बसते थे और वहीं अपने धार्मिक स्थल जैसे मंदिर-मस्जिद बनाते थे। आज उन्हीं बस्तियों को ग्रीन बेल्ट के नाम पर अवैध बताया जा रहा है, जबकि आज भी पूरे देश में सैकड़ों मंदिर-मस्जिद और बस्तियां जलस्रोतों के किनारे स्थित हैं ऐसे में धर्म स्थलों मस्जिदों को हटाने का नोटिस जारी करना अन्याय पूण है