फसल विविधिकरण और कृषि उद्यमिता पर कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यशाला का हुआ आयोजन*
*फसल विविधिकरण और कृषि उद्यमिता पर कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यशाला का हुआ आयोजन* 
सौरभ नाथ की खबर 9039502565
*अश्वगंधा की खेती से बदलेगी किसानों की किस्मत*
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- *दमोह में किसानों को अश्वगंधा की खेती के लिए प्रोत्साहित*
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- *500 एकड़ भूमि से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट*
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*अश्वगंधा की प्रोसेस कर अर्क निकलने की संभावनाओं पर विचार-मंथन*
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दमोह 17 मई 2025।
फसल विविधिकरण और कृषि उद्यमिता विकास पर कृषि विज्ञान केंद्र सागर नाक दमोह में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (डिक्की), संपदा फूड एसोसिएशन तथा भूमिशा ऑर्गेनिक द्वारा जिला प्रशासन, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन किया गया।
कार्यशाला में डिक्की के अध्यक्ष डॉ अनिल सिरवैया, संपदा फूड एसोसिएशन की डायरेक्टर डॉ मोनिका जैन, भूमिका ऑर्गेनिक डॉ राजीव जैन, कृषि क्रांति समन्वय समिति के प्रतिनिधि डॉ आदिल वेग, किसान संगठन के प्रदेश मंत्री श्री आर.सी. पटेल, जिला भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष श्री हरिश्चंद्र पटेल, प्रांतीय प्रचार-प्रसार प्रमुख श्री राम मिलन पटेल, संभागीय मंत्री श्री हेमंत पटेल, जिला अध्यक्ष किसान संगठन श्री श्रीराम पटेल, जिला उपाध्यक्ष श्री राजेश पटेल, जिला जैविक प्रमुख श्री पूरन पटेल, जिला अध्यक्ष अजाक्स डॉ मोहन आदर्श, जनपद सदस्य हटा श्री कनई पटेल, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ मनोज अहिरवार, उप संचालक कृषि श्री जे. एल. प्रजापति, जिला आयुष अधिकारी श्री डॉ राजकुमार पटेल, कृषि वैज्ञानिक डॉ राजेश द्विवेदी, कृषि वैज्ञानिक डॉ डी.पी. सिंह, सहायक संचालक उद्यान श्री यश कुमार सिंह, कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी,विकासखंड तकनीकी प्रबंधक (आत्मा), किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधि, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि प्रगतिशील किसान, जैविक/प्राकृतिक खेती करने वाले किसान एवं विभिन्न विकास खंडों से पधारे कृषकों के बीच जिले में फसल विविधीकरण एवं कृषि उद्यमिता के विकास को लेकर चर्चा-परिचर्चा की गई।
कार्यशाला में डिक्की के अध्यक्ष डॉ अनिल सिरवैया ने फसल विविधिकरण और खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और जिले में उद्यमिता एवं स्व रोजगार के अवसर निर्मित करने पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि अश्वगन्धा को खेती और इसके प्रसंस्करण की पहल दमोह जिले की पूरे देश अलग पहचान बनाएगी।
दमोह जिले में फसल विविधिकरण के तहत किसानों को अश्वगंधा की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। दमोह जिले की जलवायु अश्वगंधा की खेती के लिए उपयुक्त है, इसीलिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी अश्वगंधा की खेती के लिए दमोह जिले का चयन किया है। अश्वगंधा की खेती जिले के किसानों की किस्मत बदल सकती है। पायलट प्रोजेक्ट में जिले में 500 एकड़ में अश्वगन्धा की खेती की तैयारी की जा रही है।
संपदा फूड एसोसिएशन की डायरेक्टर डॉ मोनिका जैन अश्वगंधा और स्वीट कॉर्न की खेती और इससे होने वाले लाभों की किसानों को जानकारी दी। उन्होंने गेहूं, मूंग, धान जैसी फसलों की तुलना में अश्वगंधा जैसी फसलों की हाई वैल्यू से किसानों को आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट में 250 से 500 एकड़ भूमि पर अश्वगन्धा को खेती प्रारंभ की जाएगी। जिले के 70 से ज्यादा किसानों ने अश्वगंधा की के लिए अपनी सहमति दी।
उपसंचारक कृषि श्री जे.एल. प्रजापति ने बताया की राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना अंतर्गत जिले में 40 क्लस्टर का विकास किया जा रहा है जिसके अंतर्गत जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, एक क्लस्टर में 125 कृषक तथा प्रत्येक कृषक के पास कम से कम एक एकड़ जमीन प्राकृतिक खेती के लिए हो ऐसे कृषकों का चयन किया जा रहा है। इस मिशन के तहत कृषकों को कृषि विज्ञान केंद्र एवं लोकल प्राकृतिक खेती ट्रेंनिंग सेंटर पर प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा कृषकों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रतिवर्ष खरीफ मौसम में 2000 एवं रबी मौसम में 2000 इस प्रकार 1 वर्ष में ₹4000 यह राशि 2 वर्ष तक कृषकों को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न आदान सामग्री ड्रम आदि खरीदने के लिए डी.बी.टी. के माध्यम से भुगतान की जाएगी।
श्री प्रजापति ने बताते हुए कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती पद्धति से अश्वगंधा एवं स्वीट कॉर्न की खेती आसानी से की जा सकती है और इसकी खेती परंपरागत फसलों की अपेक्षा अधिक लाभदायक है।
गौरतलब है कि जिले में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसान संगठनों, जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के विशेष प्रयास से प्राकृतिक/जैविक खेती उत्पाद हाट बाजार प्रत्येक रविवार को जटाशंकर पार्क के पास दमोह में लगाया जा रहा है जिसमें जैविक एवं प्राकृतिक खेती करने वाले कृषक अपने उत्पादों को विक्रय हेतु लाते हैं तथा भारी संख्या में उपभोक्ता उत्पादों को क्रय करते हैं, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिल रहा है। जैविक एवं प्राकृतिक खेती से मृदा में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि होती है, किसानों के मित्र कहे जाने वाले केंचुए की संख्या में वृद्धि होती है जो प्राकृतिक रूप से मृदा की उर्वरा क्षमता को बढ़ाते हैं तथा पर्यावरण के लिए भी यह खेती अनुकूल होती है।
*डा राजीव जैन*
6260458568
