*सनातन चेतना के प्रखर स्वर, युगद्रष्टा संत डॉ. आशुतोष ब्रह्मचारी*

 

संतोष योगी की खबर 

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गौसंस्कृति, सनातन धर्म और राष्ट्रचेतना के संरक्षण के लिए सतत सक्रिय संत महामंडल प्रमुख एवं मां अंजनी अखाड़ा के सभापति डॉ. आशुतोष ब्रह्मचारी आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनका व्यक्तित्व साधना, संघर्ष और समाजोत्थान का ऐसा संगम है, जो बहुत कम देखने को मिलता है। वे केवल एक संत नहीं, बल्कि युग की आवश्यकता को समझने वाले दूरदर्शी मार्गदर्शक हैं, जिनका चिंतन धर्म तक सीमित न होकर समाज, संस्कृति और राष्ट्र की आत्मा से जुड़ा हुआ है।

डॉ. आशुतोष ब्रह्मचारी का मानना है कि गौमहाकुंभ और रुद्र महायज्ञ जैसे विराट आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के महाअभियान हैं। इन आयोजनों के माध्यम से वे युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने, नैतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने और सनातन परंपरा की वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक शक्ति को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।

उनके प्रवचनों में जहां वेदों की गूंज सुनाई देती है, वहीं वर्तमान सामाजिक विकृतियों पर तीखा लेकिन समाधानकारी चिंतन भी दिखाई देता है। वे स्पष्ट कहते हैं कि जब तक समाज में धर्म के साथ विवेक और सत्य के साथ साहस नहीं जुड़ेगा, तब तक परिवर्तन अधूरा रहेगा। यही कारण है कि उनके नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रमों में संतों के साथ-साथ बुद्धिजीवी, युवा, किसान और आमजन बड़ी संख्या में जुड़ते हैं।

नरसिंहपुर जिले के वरिष्ठ पत्रकार एवं आज तक के संवाददाता श्री अनुज ममार जी को गौमहाकुंभ एवं रुद्र महायज्ञ के लिए आमंत्रित करते हुए महाराज जी ने यह संदेश दिया कि धर्म और पत्रकारिता दोनों का मूल उद्देश्य सत्य की स्थापना है। जब निष्पक्ष पत्रकारिता और जागरूक संत समाजहित में एक साथ खड़े होते हैं, तब जनचेतना स्वतः जागृत होती है और राष्ट्र सशक्त बनता है।

डॉ. आशुतोष ब्रह्मचारी का जीवन स्वयं एक संदेश है—साधना के साथ सेवा, वाणी के साथ कर्म और धर्म के साथ राष्ट्र। यही कारण है कि उनका हर कदम, हर विचार और हर आयोजन समाज के लिए एक दिशा और प्रेरणा बनता जा रहा है।