श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में श्रीभागवत कथा का तीसरा दिवस संपन्न

संतोष योगी की खबर 9993268143

भोपाल स्थित श्री लक्ष्मीनारायण (बिड़ला) मंदिर में आयोजित श्रीभागवत कथा के तीसरे दिन वृदावन धाम से पधारे कथावाचक श्री नीरज नयनजी महाराज ने संतों की शरण में आने वाले व्यक्ति की रक्षा और मृत्यु के भय से मुक्ति का मार्ग समझाया। उन्होंने राजा परीक्षित और शुकदेव मुनि के प्रसंगों के माध्यम से शरणागति और संत की कृपा के अभेद्य कवच की महिमा बताई।

कथावाचक ने जीवन की नश्वरता और भक्ति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भक्ति के लिए अंतिम समय का इंतजार करना सबसे बड़ी भूल है। जीवन भर भगवान का नाम लेने वाला ही अंत समय में सहज रूप से प्रभु का स्मरण कर पाता है। उन्होंने शबरी और विदुर के प्रसंगों के माध्यम से बताया कि परमात्मा को सोने-चांदी या भोग नहीं, बल्कि श्रद्धा और प्रेम से भरा हृदय प्रिय है।

मधुर प्रसंगों में उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने शबरी के जूठे बेरों का आनंद अपने राजसी भोजन से बढ़कर लिया और श्रीकृष्ण ने भक्त विदुर के घर जाकर प्रेम और श्रद्धा को सर्वोपरि माना। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।

मंदिर के प्रबंधक श्री के.के. पांडेय और नारायण सेवा समिति के आयोजकों ने विधि-विधान से व्यासपीठ पूजन कराया। आरती और प्रसाद वितरण के साथ कथा के सत्र का समापन हुआ।